चिकित्सीय आहार मार्गदर्शिका
सीलिएक रोग आहार तालिका (क्लीनिकल डाइटिशियन प्लान)
आंतों की रिकवरी एवं 100% ग्लूटेन-मुक्त जीवनशैली हेतु आधिकारिक आहार तालिका।
रोगी शिक्षा — चिकित्सकीय समीक्षा लंबितअपडेट: 5 अक्टूबर 2026

आहार विवरण
सीलिएक रोग (Celiac Disease) एक गंभीर ऑटोइम्यून स्थिति है जहाँ ग्लूटेन (गेहूं, जौ, राई में पाया जाने वाला प्रोटीन) का सेवन करने से छोटी आंत की अंदरूनी परत क्षतिग्रस्त हो जाती है। विशेषज्ञ गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट एवं आहारविद् विभाग द्वारा तैयार यह प्रामाणिक आहार तालिका आंतों की सुरक्षा और पोषक तत्वों के पूर्ण अवशोषण के लिए जीवनभर 100% ग्लूटेन-मुक्त आहार का निर्देश देती है।
यह आहार किसे अपनाना चाहिए?
बायोप्सी एवं एंटी-tTG परीक्षण द्वारा सीलिएक रोग से पीड़ित प्रमाणित मरीज (Anti tTG > 10)
ग्लूटेन संवेदनशीलता (Non-Celiac Gluten Sensitivity) वाले मरीज
गेहूं के सेवन से पेट दर्द, गैस, दस्त, वजन घटने व कुपोषण से परेशान व्यक्ति
क्या खाएं (Foods to Eat)
- दूध व दूध के उत्पाद: ताजा दूध, दही, पनीर, लस्सी, खोया आदि
- सभी दालें: साबुत दालें, चना, राजमा, चवले, छोले, बेसन, मोगर व छिलका दालें
- ताजे फल एवं सारी हरी सब्जियां
- तेल व वसा: सरसों/रिफाइंड तेल, शुद्ध देसी घी, मक्खन आदि
- शक्कर व मिठास: चीनी, गुड़, शहद आदि
- सारे सूखे मेवे: बादाम, काजू, किशमिश, पिस्ता, अखरोट आदि
- शुद्ध मसाले (बिना मिलावट वाले)
- नमकीन व स्नैक्स: दाल की नमकीन, बेसन की सेव, चावल-उड़द इडली, banana chips, पॉपकॉर्न, भुना चना, अंकुरित दालें, चना टिक्की, वेज कटलेट, घर के बेसन के पकौड़े या चीला, मुरमुरा चाट, घी में तले मखाने
क्या न खाएं (Foods to Avoid)
- अनाज: गेहूं (Wheat), जौ (Barley), राई/जाव (Rye)
- गेहूं से बने उत्पाद: गेहूं का आटा, दलिया, सूजी, मैदा, सेवियां, गेहूं फ्लेक्स, सामान्य रोटी, तंदूरी रोटी, कुलचा, नान, भटूरा, चाऊमीन, उपमा, पास्ता, मैकरोनी, मैगी
- बाजार की नमकीन व फ़ास्ट फ़ूड: समोसा, मठरी, मिक्स नमकीन, ब्रेड, केक, बिस्किट, नूडल्स, रवा इडली, पाव, नमकपारे, मोमोज, बर्गर, चिली पोटैटो, मंचूरियन, फैन, गोल-गप्पे, पिज्जा, बन, बेकरी उत्पाद
- बाजार की मिठाइयां: बाजार की मिठाइयां, मिल्क केक, आटे के लड्डू, सूजी के लड्डू, बालूशाही, सेवियों की खीर/हलवा, पंजीरी, पेड़ा, गुजिया, मालपुआ, नानखटाई, शक्करपारा, घेवर
- अन्य उत्पाद: टॉफी, चॉकलेट, कस्टर्ड पाउडर, च्युइंगम, सफेद सिरका, बेकिंग पाउडर, बाजार का अचार, बाजार का सूप, कॉर्न स्टार्च, हॉर्लिक्स, बोर्नविटा, बूस्ट, कॉम्प्लान, बाजार की दूध वाली आइसक्रीम या आइसक्रीम मिक्स
रोटी बनाने के लिए सुरक्षित आटे (Flours for Roti)
सोयाबीन का आटा 1 किलो + चावल का आटा 3 किलो
बेसन 1 किलो + चावल का आटा 3 किलो
चने का आटा 1 किलो + चावल का आटा 3 किलो
बेसन 1 किलो + मक्का का आटा 1 किलो
बाजरे का आटा
मक्का का आटा
शुद्ध बेसन
मूंग दाल का आटा
ज्वार का आटा
चावल का आटा
सिंघाड़े का आटा
कूट्टू का आटा
रागी का आटा
अन्य सभी मिलेट्स: कुटकी, सानवा, काकूम, कोडोन, चिना, राजगीरा
घर की बनी मिठाइयां, हलवा एवं खीर
घर की बनी मिठाइयां: खोए की बर्फी, काजू बर्फी, नारियल बर्फी, बेसन लड्डू, गजक, फिरनी, पेठा
चावल के आटे से बने गुलाब जामुन या जलेबी
हलवा: गाजर, लौकी, बेसन या दाल का हलवा
खीर: चावल, साबूदाना, मखाने, गाजर, नारियल या समा के चावल की खीर
विशेष रसोई सलाह (Special Cooking Advice)
रोटी को नरम करने के लिए आटा गूंथते समय उसमें गर्म पानी / गर्म दूध / मलाई या तेल का इस्तेमाल करें।
हमेशा ताजा बनी हुई गर्म रोटी का ही सेवन करें।
घर में बिस्किट या केक बनाते समय गेहूं के आटे व मैदे की जगह मक्की, बाजरा या अरारोट का आटा इस्तेमाल करें।
सूप को गाढ़ा करने के लिए कॉर्न स्टार्च / कॉर्नफ्लोर की जगह चावल या अरारोट का आटा इस्तेमाल करें।
इन बातों का विशेष ध्यान रखें (क्रॉस-कंटैमिनेशन सुरक्षा नियम)
सिलियक रोगी का खाना बनाने वाला बर्तन बिल्कुल साफ हो और उस पर गेहूं का आटा ना लगा हो।
चकला, बेलन व आटा गूंथने वाला बर्तन पूरी तरह अलग होना चाहिए।
रोटी साफ तवे पर बनाएं और सिलियक रोटी को गेहूं की रोटी के साथ ना रखें।
रोटी बनाने के लिए परोथन (सूखा आटा) भी सिलियक आटा ही होना चाहिए।
सिलियक रोटी पर लगाने वाला घी या मक्खन भी अलग कटोरी/बर्तन में रखें।
खाना बनाने में हींग (Hing) का इस्तेमाल ना करें, क्योंकि बाजार की हींग में गेहूं का स्टार्च मिला होता है।
मसालों का विशेष ध्यान दें कि वे अलग मसाले वाली चक्की पर ही पिसे हों।
बाजार से कोई भी खाद्य पदार्थ खरीदने से पहले सामग्री सूची (Ingredient List) पढ़ें कि वह 100% ग्लूटेन-फ्री है या नहीं।
समय-समय पर अपने गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट एवं आहारविद् से स्वास्थ्य जांच कराएं।
भोजन योजना एवं कैलोरी तालिका
| भोजन | अनुशंसित विकल्प |
|---|---|
| सुबह जल्दी (6:00 - 6:30 AM) | 30-45 मिनट सैर या योग + 1 कप बिना शक्कर की चाय / दूध (150 ml) |
| नाश्ता (7:30 - 8:00 AM) | 1 कप दूध या दही + वेज बेसन चीला / अंकुरित अनाज / वेज पोहा / नमकीन वेज चावल / मिलेट खिचड़ी या मिलेट पोहा / साबूदाना खिचड़ी / बेसन पकौड़ा / 1-2 चपाती (सिलियक आटा) + सब्जी / 3 चावल-उड़द इडली या प्लेन डोसा या 2 उत्तपम + सांबर / 2 अंडे का सफेद भाग या 30g पनीर |
| मध्यांतर (10:00 - 10:30 AM) | 200 ग्राम ताजे फल + 1 गिलास छाछ या 1 गिलास ताजा नींबू पानी |
| दोपहर का भोजन (12:30 - 1:00 PM) | 2-3 रोटी (सिलियक आटा) + 1 कटोरी दाल + 1 कटोरी ताजी हरी सब्जी + 1 कटोरी ताजा दही |
| शाम की चाय (3:30 - 4:00 PM) | 1 कप चाय / नींबू पानी / ग्रीन टी / सूप + 1 छोटी कटोरी भुना चना / मखाने / भुनी मूंगफली / खमण / बेसन नमकीन / साबूदाना वड़ा / 2-3 ग्लूटेन-फ्री रागी बिस्किट |
| रात्रि का भोजन (7:30 - 8:00 PM) | 1 प्लेट ताजा सलाद + 2-3 रोटी (सिलियक आटा) + 1 कटोरी दाल + 1 कटोरी सब्जी |
| रात्रि का दूध (9:30 - 10:00 PM) | 1 गिलास बिना चीनी का गुनगुना दूध (200 ml) |
सामान्य प्रश्नोत्तर
हाँ, बाजरा, मक्का, बेसन, चावल, रागी, कूट्टू, सिंघाड़ा और सभी मिलेट्स 100% ग्लूटेन-फ्री हैं। आप इन्हें मिलाकर या अलग से रोटी बना सकते हैं।
बाजार में मिलने वाले हींग पाउडर में जमने से रोकने और मात्रा बढ़ाने के लिए गेहूं का आटा/मैदा (Wheat starch) मिलाया जाता है, जो सीलिएक रोगी के लिए हानिकारक है।
केवल वही ओट्स खाएं जिन पर स्पष्ट रूप से "Certified Gluten-Free" लिखा हो। सामान्य ओट्स की प्रोसेसिंग गेहूं वाले कारखानों में होती है।
बिल्कुल नहीं। सीलिएक रोग में गेहूं का एक छोटा सा अंश भी आंतों की अंदरूनी परत को गंभीर नुकसान पहुंचाता है। 100% ग्लूटेन-फ्री रहना जीवनभर अनिवार्य है।
सीलिएक मरीज के लिए अलग चकला, बेलन, तवा और घी का चम्मच रखें। गेहूं के आटे वाले बर्तनों में ग्लूटेन-फ्री रोटी न बनाएं और आटा गूंथने से पहले स्लैब को अच्छी तरह साफ करें।
सोया सॉस, बाजार के मसाले, बेकिंग पाउडर, आइसक्रीम कोन, डिब्बाबंद सूप, माल्ट वाले हेल्थ ड्रिंक्स और दवाइयों के कैप्सूल में अक्सर गेहूं का स्टार्च होता है। हमेशा सर्टिफाइड "ग्लूटेन-फ्री" लेबल जांचें।
हाँ, ताजा दूध, दही और पनीर सुरक्षित हैं। शुरुआत में आंतों में सूजन के कारण कुछ मरीजों को दूध पचने में अस्थायी परेशानी हो सकती है, जो आंतें ठीक होने पर सामान्य हो जाती है।
हर 6 से 12 महीने में Anti-tTG IgA ब्लड टेस्ट कराएं। एंटीबॉडी का स्तर सामान्य आना इस बात का प्रमाण है कि आंतें ठीक हो रही हैं और डाइट पूरी तरह शुद्ध है।
आंतों की खराबी के कारण आयरन (खून की कमी), विटामिन B12, विटामिन D और कैल्शियम का अवशोषण घट जाता है। डॉक्टर भाटी से परामर्श कर इन विटामिन्स की जांच और सप्लीमेंटेशन अवश्य कराएं।
बाहर खाते समय सादा उबला चावल, बिना तड़के वाली दाल, ताजे फल और कच्चा सलाद चुनें। जिस तेल में पूड़ियां या समोसे तले गए हों, उसमें तली कोई भी चीज (जैसे पकोड़े या चिप्स) कभी न खाएं।
आहार संबंधी जानकारी
- सीलिएक बीमारी में 100% ग्लूटेन फ्री डाइट जीवनभर अपनाना अनिवार्य है। थोड़ी सी भी लापरवाही आंतों में दोबारा सूजन पैदा कर सकती है।
- घर में गेहूं के आटे से क्रॉस-कंटैमिनेशन रोकने के लिए अलग बर्तन, चकला-बेलन, तवा और घी का डिब्बा रखें।
- विटामिन D, B12, हीमोग्लोबिन और कैल्शियम की नियमित जांच कराएं।
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कस्टमाइज्ड आहार योजना चाहिए?
डॉ. राजेंद्र भाटी से मिलकर अपनी समस्याओं के अनुसार व्यक्तिगत प्लान तैयार करवाएं।
